महावीर हनुमान जी की लंका यात्रा

वाल्मिकि रामायण और तुलसी रचित रामचरितमानस दोनों में ही हनुमान जी की लंका यात्रा का विशद वर्णन सुंदरकांड में मिलता है। समुद्र को लांघ जाने का असंभव प्रयास सिर्फ महावीर हनुमान जी ही कर सकते थे । जब सभी वानर इस सोच में पड़े थे कि इस महान समुद्र को कैसे पार किया जाए और कौन है जो लंका जा …

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कैसे समाप्त हो गया है अयोध्या का वैभव

अयोध्या अर्थात जिसे युद्ध में जीता न जा सके, अयोध्या जिसकी स्थापना स्वयं सूर्य पुत्र मनु ने की थी जिसकी तुलना इंद्र के अमरावती नगरी से की जाती है । वाल्मीकि रामायण में अयोध्या की वैभवशीलता का विस्तार से वर्णन है । जिस राज्य के राजा साक्षात सूर्य वंश से थे । जिसके राजाओं से स्वयं इंद्र भी सहायता मांगने …

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क्या महावीर हनुमान जी बाल ब्रम्हचारी हैं

शुद्ध सनातन धर्म में महावीर हनुमान जी को भक्त शिरोमणि कहा गया है । महावीर हनुमान जी की श्री राम भक्ति ठीक वैसे ही है जैसे श्री हरि विष्णु के प्रति नारद जी और ध्रुव और प्रह्लाद जी की भक्ति । कहीं हनुमान जी बाल ब्रम्हचारी तो कहीं विवाहित हैं : संपूर्ण विश्व में महावीर हनुमान जी के निजी जिंदगी …

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भगवान शिव और विष्णु का महायुद्ध

भगवान श्री हरि विष्णु और भगवान शिव के बीच अद्भुत संबंधों को शुद्ध सनातन धर्म में बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है । भगवान शिव को भगवान विष्णु का आराध्य और श्री हरि विष्णु को देवाधिदेव महादेव का आराध्य बताया जाता रहा है । भगवान विष्णु अगर जगत का पालन करते हैं तो भगवान शिव इस संसार का संहार करते हैं …

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आत्मा को पवित्र कर देती हैं भगवान विष्णु की आंखे

ऐसी मान्यता है कि भगवान योगनिद्रा में सोये रहते हैं। भगवान विष्णु की आंखे आधी खुली और आधी बंद रहती हैं। भगवान विष्णु की आंखे आधी बंद से वो ध्यान में मग्न और आनंदित रहते हैं जबकि आधी खुली आंखो से वो संसार का पालन कार्य देखते रहते हैं। भगवान के नेत्रों में महामाया का वास है। ऊं अपवित्र: पवित्रोवा …

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क्या श्रीराम और हनुमान जी सगे भाई थे

जब महावीर हनुमान जी शक्तिबाण से मूर्छित लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी लेकर आते हैं और लक्ष्मण जी उससे जीवित हो जाते हैं तो श्री राम उन्हें खुशी से गले लगा लेते हैं । इस प्रसंग का वर्णन करते हुए तुलसीदास जी लिखते हैं, इन पंक्तियों में श्रीराम और हनुमान जी की तुलना अपने प्रिय भाई भरत से करते …

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क्या है शक्ति का रहस्य, कौन हैं आद्या शक्ति ?

शुद्ध सनातन धर्म विश्व का एकमात्र ऐसा धर्म है जिसमें ईश्वर के स्वरुप को लेकर सबसे व्यापक विवेचना हुई है । ईश्वर निराकार हैं या साकार है, नर हैं या नारी हैं, एक हैं या अनेक हैं इसको लेकर वेदों, पुराणों से लेकर महाकाव्यों और कई महान ग्रंथों में अलग अलग विवेचनाएं की गई है । विश्व में शुद्ध सनानत …

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श्रीराम के वंशज, गुरु नानक देव जी Guru Nanak Devji & Ram

श्रीराम और नानक देव जी के बीच क्या रिश्ता है। सिख धर्म और हिंदू धर्म के बीच क्या संबंध है। हम सभी जानते हैं कि सिख धर्म हिंदू धर्म से ही निकली एक शाखा है। सिख धर्म के प्रवर्तक गुरु नानक देव जी हैं । श्रीराम का उल्लेख गुरुग्रंथ साहिब जी में कई बार आया है। राम नाम जप और …

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भगवान से मित्रता से मोक्ष मिलता है

सनातन धर्म में भक्ति के नौ प्रकार बताए गये हैं जिन्हें नवधा भक्ति भी कहते हैं। इस प्रकार की भक्ति में ईश्वर से प्रति मित्रता का भाव रख कर उनकी उपासना की जाती है। सनातन धर्म में ऐसे कई भक्त हुए हैं जिन्होंने ईश्वर के प्रति अपनी मित्रता का भाव रख कर भी ईश्वरीय कृपा प्राप्त की है। भगवान से …

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जगतगुरु रामानंदाचार्य

अलावार और नयनार संतों ने दक्षिण भारत जो भक्ति की धारा चलाई उसे वल्लभाचार्य, निम्बार्काचार्य और माध्वाचार्य ने दक्षिण भारत के कोने कोने में फैला दिया। अब बारी उत्तर भारत की थी। दक्षिण भारत से उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन का लाने वाली महान आत्मा का नाम था स्वामी रामानंदाचार्य। उन्ही के लिए यह कहा जाता है कि “उपजी द्रविड़ …

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भगवान श्री विष्णु के चक्रावतार निम्बार्काचार्य

वैष्णव मत के अनुसार भगवान श्री हरि विष्णु से ही सारे धर्मों और जीवों की उत्पत्ति हुई है। भगवान के इच्छा मात्र से ही भक्ति संप्रदायों का उद्भव हुआ। विष्णु के चक्रावतार निम्बार्काचार्य निम्बार्क संप्रदाय को इसी लिए सबसे प्राचीन संप्रदाय की संज्ञा दी जाती है विष्णु के चक्रावतार निम्बार्काचार्य संप्रदाय की उत्पत्ति : निम्बार्काचार्य संप्रदाय उत्पत्ति भगवान श्री विष्णु …

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श्री कृष्ण भक्ति के महान संत माधवाचार्य

आज पूरे विश्व में इस्कॉन और अन्य कृष्ण भक्ति से जुड़ी संस्थाओं के प्रयासों से कृष्ण भक्ति की जो गंगा अविरल प्रवाहित हो रही है उसकी गंगोत्री हिमालय में नहीं बल्कि दक्षिण भारत में हैं। आदिगुरु शंकराचार्य ने जब निराकार ब्रम्ह की अवधारणा दी और देश को कर्मकांड और जाति प्रथा से मुक्त कराने का अभियान किया तो उनके इस …

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भगवन के भक्ति की पराकाष्ठा रामानुजाचार्य

भारत में सनातन धर्म जब कर्मकांडों के जाल और जातिवाद के जहर से आपस में बंट रहा था तब रामानुजाचार्य ने जातिवाद के जहर से मुक्त कराने के लिए अद्वैत का सिद्धांत दिया था। इस सिद्धांत के मुताबिक सभी मानव चाहे किसी भी धर्म और जाति के हों ईश्वर के ही अंश हैं और इस माया रुपी झूठे संसार में …

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भारत को एक राष्ट्र बनाने वाले जगद्गुरु आदि शंकराचार्य

भारत की भाषा संस्कृत और सनातन धर्म ने भारत को एक सूत्र में बांधने का शंकराचार्य जी ने किया है। भगवान श्री राम ने उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक भारत को एक सूत्र में बांधा। श्री कृष्ण ने भी युधिष्ठिर के नेतृत्व में एक राष्ट्र को जन्म दिया । वहीं चाणक्य और शंकराचार्य ने भी भारत को सांस्कृतिक , …

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