सनातन धर्म एक अद्भुत धर्म है जो न सिर्फ मानवों के कल्याण के लिए है, बल्कि यह पशुओं, पक्षियों और प्राणीमात्र के कल्याण के लिए है । किसी भी अन्य धर्म में दूसरे प्राणियों के हित की इतनी चिंता नहीं की गई है जितनी सनातन धर्म के शास्त्रों में की गई है। सनातन धर्म मे विशेषकर हाथियों के बारे में अद्भुत व्याख्यान हैं।
यजुर्वेद में हाथी पालने का वर्णन
ऋग्वेद और सामवेद में हाथियों का कोई वर्णन हमें आश्चर्य चकित करता है । संभव है मूल ऋग्वेद का पूरा पाठ जब उपलब्ध हो जाए तो इनमें भी हाथियों का जिक्र हो , लेकिन सबसे पहले यजुर्वेद में हाथियों का जिक्र आता है । यजुर्वेद मे हाथियों को पालने की विधि का विस्तार से उल्लेख किया गया है। वैसे तो वाल्मीकि रामायण में हाथियों का वर्णन विस्तार से किया गया है । लेकिन एक विशेष गज या हाथी का वर्णन श्रीराम के प्रिय हाथी के रुप में आता है । इस हाथी का नाम शत्रुंजय है। श्रीराम जब वनवास के लिए प्रस्थान कर रहे थे तब उन्होंने अपने इस प्रिय हाथी का दान अपने गुरु पुत्र सुयज्ञ को कर दिया था। इसी प्रकार वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड में रावण की छाती पर एरावत हाथी के दांतों के निशान पड़ने का उल्लेख है ।
महाभारत में हाथी का वर्णन
महाभारत में आठ दिग्गज हाथियों के वर्णन के अलावा दो प्रसिद्ध हाथियों का वर्णन विशेष रुप से आता है । पहला हाथी अश्वत्थामा है। अश्वत्थामा हाथी का वध भीम ने किया था और कृष्ण के कहने पर युधिष्ठिर ने इसी हाथी अश्वत्थामा की मृत्यु की सूचना द्रोणाचार्य को दी थी। “अश्वत्थामा हतो नरो वा कुंजरः” अर्थात “अश्वत्थामा मारा गया लेकिन नर नहीं हाथी।“ द्रोणाचार्य के पुत्र का नाम भी अश्वत्थामा था। युधिष्ठिर के इस अर्धसत्य पर विश्वास कर द्रोण ने अपने हथियार रख दिये थे और धृष्टध्युम्न के उनका वध कर दिया था।
महाभारत का दूसरा प्रसिद्ध हाथी सुप्रतीक है । इस हाथी पर सवार होकर प्रागज्योतिषपुर के राजा भगदत्त ने युद्ध किया था । इस हाथी का वध भी भीम के द्वारा किया गया था। महाभारत में कौरवों की राजधानी हस्तिनापुर का नाम भी हस्ती अर्थात हाथी पर पड़ा है। कहा जाता है कि हस्तिनापुर में हाथियों की बहुतायत थी। इसके अलावा कुरु वंश के एक राजा का नाम भी हस्तिन था जिनके नाम पर हस्तिनापुर राजधानी बसी हुई थी ।
पौराणिक कथाओं में अष्ट दिग्गज हाथियों का वर्णन
पौराणिक कथाओं में गज या हाथी का विशेष रुप से वर्णन किया गया है। कथाओ के अनुसार आठ सबसे बलशाली गजों या हाथियों ने इस पृथ्वी को अपने सिरों पर थाम रखा है । ये सारे आठो हाथी अष्ट दिग्गज कहे जाते हैं और आठों दिशाओं में स्थित होकर पृथ्वी को अपने सिरों पर धारण करते हैं। ये आठो हाथी या गज अकूपार नामक एक कछुए पर खड़े हैं। इन्हे दिग्गज कहा जाता है। दिग्गज शब्द की उत्पत्ति दिक् अर्थात दिशा और गज अर्थात हाथी से हुई है । दिग्गज का अर्थ है दिशाओं को संभालने वाले हाथी।
वाल्मीकि रामायण के बालकांड में चारों दिशाओं को संभालने वाले चार हाथियों या गजों का उल्लेख है। बाद की कथाओं में इनकी संख्या आठ हो जाती है। इनके नाम हैं – ऐरावत, अंजन, महापद्म, पुंडरिक, वामन , कुमुद , सार्वभौम , सुप्रतीक और पुष्पदंत ।
हाथियों में श्रेष्ठ ऐरावत
सभी हाथियों में ऐरावत को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। ऐरावत की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी । एरा शब्द ईरा से निकला है जिसका अर्थ जल होता है । इसका अर्थ यह हुआ है यह हाथी समुद्र से निकला था। इस हाथी के चार दांत हैं और यह इंद्र का वाहन है । समुद्र मंथन के बाद इंद्र ने इस हाथी को अपनी सेवा में ले लिया था । श्रीमद्भगवद् गीता में श्रीकृष्ण ने अपनी तुलना गजों में श्रेष्ठ ऐरावत से की है । बौद्ध और जैन धर्मों में भी ऐरावत हाथी का उल्लेख बड़ी श्रद्धा और सम्मान से किया जाता रहा है ।
लक्ष्मी का वाहन हाथी है
हाथी को सनातन धर्म में सौभाग्य और समृद्धि से जोड़ा जाता रहा है । इंद्र के वाहन के अलावा माता लक्ष्मी के एक स्वरुप गजलक्ष्मी का वाहन भी एक सफेद हाथी है । वैसे भी माता लक्ष्मी का अभिषेक दो हाथी करते हैं । प्राचीन मूर्तियों में माता लक्ष्मी को दो हाथियों के द्वारा जलाभिषेक करते हुए दिखाया गया है।
गज और ग्राह की कथा
- पौराणिक कथाओं में गंडक नदी के किनारे एक विष्णु भक्त गज की कथा आती है । कथा इस प्रकार है कि एक बार यह गजराज गंडक नदी के किनारे अपने परिवार के साथ पानी पीने गया। उस वक्त जल के अंदर एक मगरमच्छ रहता था। उसने गजराज का पैर पकड़ लिया और उसे पानी के अंदर खींचने लगा ।
- गजराज धीरे- धीरे पानी के अंदर जाने लगे। सारे प्रयासों के बाद भी जब गजेंद्र खुद को मगरमच्छ से मुक्त करने में असफल रहे तो उन्होंने भगवान श्री विष्णु हरि की स्तुति की । श्री हरि विष्णु ने गजेंद्र की रक्षा के लिए अपने सुदर्शन चक्र से मगरमच्छ को मार डाला और गजेंद्र को मुक्त कर दिया। इसी कथा के आधार पर 16 वीं सदी के महान संस्कृत विद्वान पंडितराज जगन्नाथ ने गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र की रचना की थी। इस स्तोत्र को पढ़ने से व्यक्ति किसी भी संकट से मुक्त हो जाता है।
- पौराणिक कथाओं के अनुसार ये गजेंद्र पूर्वजन्म में पांड्य वंश का राजा इंद्रद्युम्न था जिसकी एक भूल की वजह से ऋषि अगत्स्य ने उसे हाथी बनने का शाप दे दिया था। लेकिन ऋषि ने उसे यह भी कहा कि भगवान विष्णु ही उसे इस शाप से मुक्त करेंगे।
भगवान गणेश का संबंध हाथी से है
सनातन धर्म के एक महान और महत्वपूर्ण देवता भगवान गणेश का सिर हाथी का है । कथाओं के अनुसार माता पार्वती ने गणेश जी को अपने शरीर के मैल से बनाया । एक बार जब माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं तब उन्होंने अपने पुत्र को आदेश दिया कि वो घर के बाहर पहरा दें और किसी को भी प्रवेश न करने दें।
जब माता पार्वती से मिलने के लिए भगवान शिव आए तो गणेश जी ने उनका मार्ग रोक दिया। भगवान शिव और गणेश जी में युद्ध छिड़ गया। क्रोध में आकर भगवान शिव ने गणेश जी का सिर काट दिया। इस बात का जैसे ही माता पार्वती को पता चला वो क्रोधित हो गईं। भगवान शिव ने माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए गणेश जी के सिर पर हाथी का सिर लगा दिया। गणेश जी के हाथी का सिर उनकी बुद्धिमत्ता का प्रतीक भी है । हाथी के सिर वाले गणेश जी गजानन भी कहे जाते हैं और उनकी पूजा सर्वत्र संसार में सर्वप्रथम की जाती है। गणेश जी भगवान शिव के गणों के अधिपति भी हैं और अपने भक्तों के विघ्नों को हरने वाले भी हैं।